You are here
Home > Daily GK Update > Magahi Writer Shesh Anand Madhukar Awarded Sahitya Akademi’s Bhasha Samman

Magahi Writer Shesh Anand Madhukar Awarded Sahitya Akademi’s Bhasha Samman

Magahi Writer Shesh Anand Madhukar Awarded Sahitya Akademi's Bhasha Samman

Magahi Writer Shesh Anand Madhukar Awarded Sahitya Akademi’s Bhasha Samman,About Shesh Anand Madhukar,About the Sahitya Akademi.

Magahi writer Shesh Anand Madhukar, who has been working extensively for the development of the language, was honoured with this year’s Sahitya Akademi Bhasha Samman award on Wednesday.

हिंदी में पढ़ने के लिया पेज को नीचे की और स्क्रोल करो

The second writer of Magahi language to be given the award, Madhurkar was conferred the award, comprising a Rs 1 lakh cheque and a memento, by Sahitya Akademi President Vishwanath Prasad Tiwari.

About Shesh Anand Madhukar
Madhukar started his career as a lecturer in Hindi at the BSK College, Methan in 1966 and eventually became a reader and professor at the Saint Columba College, Hazaribagh.

he has a large body of work to his credit in both Magahi and Hindi. Some of his important works in Hindi are “Magahi Kavita Ke Bimb”, “Eklavya”, and “Bhagwan Birsa”. In Magahi, his well-acclaimed works are “Eklavya” and “Magahi Bhulachal Hey”.

About the Sahitya Akademi.

Sahitya Akademi provides annual books for outstanding books and excellent translations in 24 recognized languages. Even so, the Akademi realizes that in a multilingual country like India, where there are several hundred languages ​​and sub languages, it should be extended beyond the recognized languages ​​and non-accredited languages ​​as well as creative literature as well as academic research Should encourage.

History of language honors
First language honors were given in the year 1996, in which Shri Dhariking Mishra (Bhojpuri), Shri Banshi Ram Sharma and Shri M.R. Thakur (Himachali), Shri K. Jatappa Rai and Mr. Mandar Keshav Bhatt (Tulu) and Shri Chandrakant Murra Singh (Kakborok) were honored for their contribution in the development of their own languages.

Prize money Rs. 50,000 / – (In 2001, its prize money was increased from Rs.25,000 / – to Rs.40,000 / – and from year 2003 to Rs.40,000 / – has been increased to 50,000 / -, This is the first step in the accomplishment of this objective. On the basis of the recommendations of the committee of experts constituted for this purpose, this honor is given to 3-4 persons each year for different languages.

Magahi लेखक शैश आनंद मधुकर साहित्य अकादमी के भाषा सम्मान सम्मानित

भाषा के विकास के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहे मेघही लेखक शैश आनंद मधुकर को इस साल साहित्य अकादमी भाषा सम्मान पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

माधवी भाषा के दूसरे लेखक का पुरस्कार दिया जाने वाला, मधुकर को साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी द्वारा 1 लाख रुपये का एक चैक और एक स्मृति चिन्ह मिला।

सेश आनंद मधुकर के बारे में

मधुकर ने 1 9 66 में मेथन के बीएसके कॉलेज, हिंदी में एक व्याख्याता के रूप में अपना कैरियर शुरू किया और आखिरकार हजारीबाग के सेंट कोलंबा कॉलेज में एक रीडर और प्रोफेसर बन गए।

उनके पास मेघही और हिंदी दोनों में अपने काम का एक बड़ा हिस्सा है हिंदी में उनके कुछ महत्वपूर्ण काम “मगही कविता के बम्ब”, “एकलव्य” और “भगवान बिरसा” हैं। Magahi में, उनकी अच्छी तरह से प्रशंसित काम “एकलव्य” और “Magahi Bhuchachal अरे” है।

साहित्य अकादेमी के बारे में।

साहित्य अकादेमी अपने द्वारा मान्य 24 भाषाओं में उत्कृष्ट पुस्तकों तथा उत्कृष्ट अनुवादों के लिए वार्षिक पुरस्कार प्रदान करती है। फिर भी, अकादेमी यह महसूस करती है कि भारत जैसे बहुभाषाई देश में जहाँ कई सौ भाषाएँ और उपभाषाएँ हैं, उसको अपनी गतिविधियों की परिसीमा मान्यता प्राप्त भाषाओं से परे ब़ढानी चाहिए और ग़ैर-मान्यता प्राप्त भाषाओं में भी सृजनात्मक साहित्य के साथ-साथ शैक्षिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना चाहिए।

भाषा सम्‍मान का इतिहास

प्रथम भाषा सम्मान वर्ष 1996 में प्रदान किया गया, जिनमें श्री धरीक्षण मिश्र (भोजपुरी), श्री बंशी राम शर्मा और श्री एम. आर. ठाकुर (हिमाचली), श्री के. जतप्पा राय और श्री मंदार केशव भट्ट (तुलु) के लिए तथा श्री चंद्रकांत मुरा सिंह (काकबरोक) को अपनी-अपनी भाषाओं के विकास में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

पुरस्कार की राशि 50,000/-रु. प्रदान की जाती है (वर्ष 2001 में इसकी पुरस्कार राशि 25,000/-रु. से बढ़ाकर 40,000/-रु. कर दी गई थी तथा वर्ष 2003 से 40,000/-रु. की राशि को बढ़ाकर 50,000/-रु. कर दिया गया है, जोकि इस उद्देश्य की सिद्धि में प्रथम चरण है। इस उद्देश्य के लिए गठित विशेषज्ञों की समिति की अनुंशसाओं के आधार पर प्रत्येक वर्ष यह सम्मान 3-4 व्यक्तियों को विभिन्न भाषाओं के लिए दिया जाता है।

Top