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Lieutenant General Anil Chauhan, the new DGMO of the Army.

Lieutenant General Anil Chauhan, the new DGMO of the Army.

Lieutenant General Anil Chauhan, the new DGMO of the Army.

New Delhi: Lt Gen Anil Chauhan took over the charge of Director General (DGMO), New Army Operations of the Indian Army on Tuesday. They take Gen. AK Bhatt, who will be in charge of the 15th Corps of Srinagar.Lt Gen Chauhan was commissioned in the 11th Gorkha Rifles in 1981.

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Lieutenant General Anil Chauhan has a tremendous experience in the campaign against militancy. He has worked on many important posts in the Army. He has also been a military observer in UN peacekeeping mission in Angola.Lt Gen Anil Chauhan has led the infiltration of terrorists in Jammu and Kashmir and the North East and command assignment in terrorism affected areas.

He has served various capacities in Army Headquarters and as UN Military Observer in Angola. Lt Gen Chauhan, a former student of the National Defense Academy of Khadakwasla and the Indian Military Academy of Dehradun, was commissioned in the 11th Gorkha Rifles in 1981.

What is the work of DGMO?

DGMO’s main job is to keep an eye on every military operation and pay attention to the strategy of the Army. There has been a lot of tension over the border for the past few days, so the challenges of Lieutenant General Anil Chauhan will not be reduced.

लेफ्टिनेंट. जनरल अनिल चौहान थलसेना के नए डीजीएमओ.

नई दिल्ली: लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को भारतीय थल सेना के नए सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) का कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने ले. जनरल ए के भट्ट का स्थान लिया जो श्रीनगर स्थित 15वीं कोर के प्रभारी होंगे।लेफ्टिनेंट जनरल चौहान को 1981 में 11वीं गोरखा राइफल्स में कमीशन दिया गया था।

लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को उग्रवाद के खिलाफ अभियानों का खासा अनुभव है। वह सेना में कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। वह अंगोला में संयुक्त राष्ट्र शांतिवाहिनी मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक भी रह चुके हैं।लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने जम्मू-कश्मीर और उत्तर पूर्व में आतंकियों की घुसपैठ और आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में कमांड असाइनमेंट का नेतृत्व किया है।

उन्होंने सेना मुख्यालयों में विभिन्न क्षमताओं और अंगोला में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में काम किया है। खडकवासला के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और देहरादून की भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र, लेफ्टिनेंट जनरल चौहान को 1981 में 11वीं गोरखा राइफल्स में कमीशन दिया गया था।

क्या होता है डीजीएमओ का काम?

हर मिलिट्री ऑपरेशन पर बारीकी से नजर रखना और सेना की रणनीति पर ध्यान देना डीजीएमओ का मुख्य काम होता है. सरहद पर बीते कुछ दिनों से काफी तनाव है, ऐसे में लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान की चुनौतियां कम नहीं होंगी.

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